STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Inspirational

4  

V. Aaradhyaa

Inspirational

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

1 min
14

सुन जिन्दगी!तेरी कहानी कुछ ऐसी हो,

मेरी अदालत में कभी तेरी पेशी हो,


तेरी हाजिरी के सपने देखूं मैं,

ऐ ज़िन्दगी,और वो हकीकत में तब्दील हो ।


न्याय के दरबार में मुंसिफ बना बैठूं मैं,

सजायाफ्ता खड़ी हो कठघरे में तू,


फैसले लेने का हक हो सिर्फ मेरा,

और तू बेबस सी मुवक्किल हो ।


आंखों पे ना हो कोई पट्टी बंधी,

इंसाफ़ का तराजू हो हाथों में मेरे,


अपने सारे गुनाह तू कुबूल करे,और,

मौत की आगोश़ में तू मुजम्मिल हो ।


ऐ जिन्दगी!तेरी कहानी कुछ ऐसी हो,

मेरी अदालत में कभी तेरी पेशी हो,


फैसले लेने का हक हो सिर्फ मेरा,

और तू बेबस-सी मुवक्किल हो ।

             --


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational