STORYMIRROR

Dr.Rashmi Khare"neer"

Abstract

3  

Dr.Rashmi Khare"neer"

Abstract

युग

युग

1 min
180

बहना मेरा काम

कभी वेग कभी मौन


कभी इठलाती कभी शांत

कभी बचपन की अठखेलियां


कभी तो जवानी की मदमस्त

और फिर बुढ़ापा का वो रूप भी

जहां कमजोर पड़ती


हर रूप में जीती बहती

युगों युगों से अनंत कहानी मेरी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract