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Rima Jain

Tragedy

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Rima Jain

Tragedy

ये कलयुग है

ये कलयुग है

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उन्होंने सूखी चावल खिला के भी तारीफें बटोरे,

और यहा हमने पूरी बिरियानी खिला के भी सिर्फ ताने ही बटोरे..


फर्क सिर्फ इतना हीं है, ये कलयुग है

यहा जो दिखता है वो बिकता है।


उनकी मीठी चापलूसी भरी बातो की लोगो ने सराहना की,

और हमारी सच्ची कड़वी बातो की तो सिर्फ समालोचना हुई..


फर्क सिर्फ इतना हीं है, ये कलयुग है

यहा मिठ बोलो की जय जयकार है और सच्चे इंसानों की हाहाकार है।


उनके कूटनीतिक स्वभाव को लोगो ने समय की मांग समझा,

और हमारे स्वाभिमानी ईमान को तो लोगो ने सिर्फ और सिर्फ हमारा अहंकार समझा..


फर्क सिर्फ इतना हीं है, ये कलयुग है

यहा बहरूपियो के लिए लोग ताली बजाते है और ईमानदारो को तो सिर्फ कटघरे मे खड़ा करवाते है।।




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