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chandraprabha kumar

Inspirational

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chandraprabha kumar

Inspirational

ये बढ़ते चरण

ये बढ़ते चरण

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मैंने जो देखा है,

मैंने जो समझा है,

मेरा जो पथ है,

उसे तुम बदल न पाओगे। 

बहुत ऑंच से गुजरी हूँ मैं,

बहुत ऑंच से निखरी हूँ मैं।


अब मुझे रोक न पाओगे ,

सब सहकर मन क्षार हुआ है।

बहुत वेदना झेली है,

बहुत तपन भी ले ली है।

अब जो फ़ौलाद बना है

वह तपनों से दूर बना है। 


इन सबसे वह गुजर चुका है,

इन सबसे वह निखर चुका है।

हाय यादों के पुलिन्दे

और अतीत के वे साये,

भविष्य की अनावृत कोमल पीठ को

और ज़ख़्मी न बनायें। 


अब तो जो मन आज़ाद हुआ है,

आज़ादी उसकी बॉंध न पाओगे।

पीड़ाओं से जो गुजरा है

आहों के सागर पार किये हैं,

तब यह तट आ पाया है

अब उसको लौटा न सकोगे। 


मेरे ये बढ़ते चरण,

रोक न अब पाओगे।

मेरा सबका उन्मुक्त हास्य,

यहॉं से चले वहॉं तक फैले ।

विस्तार में धरा गगन समेट ले,

असीम विस्तार तुम्हें भी बॉंध ले।


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