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Andrendra Kant Tiwari

Tragedy

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Andrendra Kant Tiwari

Tragedy

यादों की कोठरी

यादों की कोठरी

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गर यादों की कोठरी मैं खुली छोड़ आया कभी

कुछ पल हैं जो मेरे आज को तबाह कर बैठेंगे

मुझसे बावस्ता कई जिंदगियां भी हिल जाएंगी

सूख चुके ज़ख्मी ज़हन में जहर हम भर बैठेंगे।



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