STORYMIRROR

Shubham Kumar

Romance

3  

Shubham Kumar

Romance

~ यादें ~

~ यादें ~

1 min
451

जब जब यादों के अंधेरों में

हमारे साथ को तड़पोगे


देख लेना उस चाँद को

वो वहीं था, रहेगा वहीं

 

क्या फर्क पड़ता है,

तू कहीं मैं कहीं

जब जब यादों के अंधेरों में


इस पल में बिखरने से पहले,

कुछ पल संवर जाने दो


बंद मुट्ठी में सिमटी,

चुपके से उन यादों को

हवा बन उँगलियों से

फिसल जाने दो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance