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Shubham Kumar

Others


5.0  

Shubham Kumar

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।। हे शंखनाद ।।

।। हे शंखनाद ।।

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जैहूँ मिले हैं मुश्किल - ' मोती '

कबहूँ मिले तैहूँ - ' कंकड़ ' ।


ओह दुर्बल और लाचारों में

इक कल्पित माँ की

बिलखत-ए-अश्कों की धारों में।


तेहूँ कोई नहीं, जैहूँ सब कुछ

तस शंखनाद है - ' शंकर '।

ओह मिले है जैहूँ, जानत ' कंकड़ ' ।।


चाको मनु दृष्टि से, ' मोती मुश्किल माया ' ;

अहो नीलकंठ तें - अठु समाया ।


करहौं दूर दुविधा भक्तन की ' शंभू ' ;

है कंकड़ तौं या तौं मोती ?


मोहा ' मनो-मेघ ' है ' कलपत-रोती ' ;

है कंकड़ तौं या तौं मोती ? 


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