STORYMIRROR

LALIT MOHAN DASH

Abstract Classics Inspirational

4  

LALIT MOHAN DASH

Abstract Classics Inspirational

यादें की छाया

यादें की छाया

1 min
339

तेरे साथ साथ चलने को तमन्ना था मन में

धूप हो या ठंड हो या हो रिमझिम बरसात

मीठी मीठी बातें में कैसे गुजर जाता है वक्त

फिर हम पहुंच जाते अपने मंजिल पर 

और ये हमें बिलकुल पता ही नहीं चलता !


ये देखो ! कैसे हम रास्ते पर अकेले चल रहे हैं

जाना है हमें दूर ,बहुत दूर .........

शायद उस पहाड़ के उस पार दूर दिगंत तक

मंजिल कहां पर है , अबतक हमें पता ही नहीं है


पर जानेमन ! बिलकुल अकेला नहीं हैं हम 

गौर से देखो ! अहसास कर लो यार !

 तेरे यादें की छाया कैसे चलती है मेरे साथ

मन ही मन प्यार की गीत गाते गुनगुनाते हुए .... !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract