STORYMIRROR

Dr.R.N.SHEELA KUMAR

Abstract

2  

Dr.R.N.SHEELA KUMAR

Abstract

व्यर्थ

व्यर्थ

1 min
157

भूख मिटाने के बाद दिये गये खाना

समुद्र में बरसाती बारिश

अमीर आदमी को दियेग ये उपहार

दिन में जला हुए दिया

बिना प्यार हुए बंधन

मंदबुद्धि वाले किये व्यापार

बिना सीमा किये दोस्ती

धोकेबाजी के प्यार

व्यर्थ व्यर्थ व्यर्थ



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract