वर्षा : वर या डर
वर्षा : वर या डर
कोई वर्षा का आनंद लेता,
तो को इससे भयभीत रहता।
किसी के लिए वर्षा वर।
किसी के लिए वर्षा डर।।
किसी का दिल मचलता,
बूँदों के गिरने से।
किसी का दिल दहकता,
चट्टान के धसकने से।
किसी के लिए वर्षा वर।
किसी के लिए वर्षा डर।।
वर्षा की याचना करता किसान,
तो कोई है बाढ़ से परेशान।
कोई बिन बारिश सूख रहा,
तो कोई बारिश में डूब रहा।
कहीं बिजली की है घर्र घर्र,
कहीं मेंढक की टर टर।
किसी के लिए वर्षा वर,
तो किसी के लिए डर।
