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Anuj 'Chaitra'

Abstract

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Anuj 'Chaitra'

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वसंत

वसंत

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हरे - हरे खेत में;

खिल रहे हैं फूल,

ठण्डी - ठण्डी पवन से;

उड़ रही है धूल। 


इस ऋतु की गंध से ;

हो रहा हूँ मोहित,

करने को कुछ नया ;

हो रहा हूँ प्रेरित। 


इस वसंत के मौसम को;

देख रहे सब प्राणी व जन, 

इस मनोरम मौसम में;

मधुर हो रहा वाणी व मन। 



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