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Anuj 'Chaitra'

Abstract

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Anuj 'Chaitra'

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शब्द

शब्द

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लिखने को कुछ नया,

सोच रहे हैं कई कवि। 

कभी शब्द नहीं है, 

तो कभी बने न लय। 


भावनाओं को व्यक्त करना, 

होता कर्तव्य कवि का। 

चाहे लय-ताल हो या न, 

बस शब्दों का होना चाहिए ज्ञान। 


शब्दों का ज्ञान होता,

नमक समान। 

लय ताल का ज्ञान, 

मसालों के समान। 

( उपयुक्त पंक्ति में कवि कहना चाहते हैं कि शब्द नमक के समान होता है अर्थात् जो अनिवार्य है तथा लय ताल मसाले के समान जो खाने रूपी कविता को बढ़िया बनाता है परन्तु इसकी आवश्यकता जरूरी नहीं।) 



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