वर्ण पिरामिड
वर्ण पिरामिड
वर्ण पिरामिड -आभासी मंचों से लाभ हानि ये लाभ हानि का चक्कर भी उलझा देता हम मानवों को कैसी विडंबना है। ये सोच हमारी आभासी है तो क्या हो गया लाभ-हानि तो होगा सोच पर निर्भर। दे रहा सबको अवसर लाभ उठाओ या गर्त में जाओ सब आपके हाथ। ये मंच आभासी मगर हम तो प्राणवान फायदा उठाओ वैकल्पिक व्यवस्था। दे रहा है हमें नई राह सुविधा के साथ उन्हें जो विकल्पहीन मानते थे खुद को। ये मंच आभासी अवसर दें हर किसी को विविध आयामी बहुत विकल्पीय। मैं कल तक था अंधेरे में पहचान है आभासी मंचों से बदलाव का दौर। ये मानो आज ये वरदान मिला हमको अभिभूत हूँ मैं अपनी चमक से। मैं क्यों किसी को लाभान्वित होते हैं सब जान रहे आप समझें भलीभाँति। ये मंच आभाषी बढ़ाते हैं हमारी लेखनी दुनिया भर में पहुँचा देते हैं लाभ हानि के बिना। जो हम लिखते सहेजते प्रतिक्रिया पा कमियाँ सुधार आगे बढ़ते जाते। ये मंच आभासी होकर भी खूब बोलते, हमें सुनना समझना है उसे। ये लाभ हानि तो सब जगह होता रहता फिर आभासी मंच कैसे बचे रह सकते भला। सुधीर श्रीवास्तव
