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Kanchan Jharkhande

Abstract Inspirational


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Kanchan Jharkhande

Abstract Inspirational


वृद्धावस्था की वेदना

वृद्धावस्था की वेदना

1 min 10 1 min 10

वह नर था वह नारी थी 

वह प्रेम था वह स्नेह थी

एक फूल सा दिल में खिला

प्रेम कहे तू मेरा भाग्य है


स्नेह कहे तू नसीब से मिला

फिर संयोग की बिजली कोई

दोनों के जीवन मे गिरी

प्रेम स्नेह का हो लिया

स्नेह प्रेम की हो चली


फिर जीवनमयी संघर्ष में

दोनों साथ-साथ बढ़ते रहे

श्रष्टि में प्रेम की बुनियाद

बुनते रहे,


विस्तार हो गया प्रेम भी

स्नेह भी पनपता रहा

यूँ ही कुछ जीवन का 

फ़लसफ़ा चलता रहा,

फिर एक सदी सी बीत गई


दोनों के दाम्पत्य जीवन में

वो भी देह खो चला

वह भी देह खो चली

एक कहानी प्रेम की

कुछ यूँ बुजुर्ग हो चली


बना के आशियाना कोई

वो बेघर हो चले 

उम्मीद के बीज बोए थे

सन्तानों को खो चले


खुद के घर से बेदख़ल

अब वे वृद्धाश्रम के हो चले। 


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