वक़्त से हार जाने को
वक़्त से हार जाने को
वक़्त से हार जाने को हार नहीं समझता मैं
किसी को अपना गुनहगार नहीं समझता मैं
इश्क़ है कहना आसाँ है निभाना है मुश्किल
खुद को इश्क़ का दावेदार नहीं समझता मैं
भोला चेहरा मीठी बातें दिल के काले लोग
ऐसे लोगों को कभी दिलदार नहीं समझता मैं
जो पेड़ फल से लदा है और सीधा खड़ा है
ऐसे पेड़ को कभी फलदार नहीं समझता मैं
जिस अखबार में न हो कराह अपने लोगों का
ऐसे अख़बार को अख़बार नहीं समझता मैं
जो मिलता है मुझे दुनियाँ से मैं वो लीख देता हूँ
खुद को बहुत बड़ा सुखनकार नहीं समझता मैं !
