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akshata alias shubhada Tirodkar

Abstract

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akshata alias shubhada Tirodkar

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वोकल फॉर लोकल

वोकल फॉर लोकल

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202

आज़ादी का नारा पुकारा था कई साल पहले 

१९४७ में हम सब ब्रिटिशों के जुल्मों से आज़ाद हो गये 

आज़ादी के कितने साल मनाये हैं हमने 

फिर से गूंज रही है वही पुकार 

फिर से आज़ाद होना है एक बार 

कोरोना जैसे विदेशी रोग से लड़ रहा है सारा हिंदुस्तान 

इस रोग ने सेहत के साथ अर्थव्यवस्था पर हमला किया 

दोनों तरफ से सोचने पर मजबूर किया 

अब बारी है सेहत को तंदुरुस्त रखने की 

उसके साथ देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने की

अब उठ रही है आवाज़ स्वदेशी बनेगी 

विदेशी वस्तु को बाहर फेंकेगी

फिर से देश को आज़ाद करना है

वोकल फॉर लोकल यही अब सबका नारा है।



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