STORYMIRROR

विजय बागची

Abstract

4  

विजय बागची

Abstract

वो हमें याद आएंगे

वो हमें याद आएंगे

1 min
540

जब वो भूल जाएंगे,

वो हमें याद आएंगें।

वो जग मुस्कुरायेंगे,

तब हम जग बनायेंगे,

जब वो भूल जाएंगे,

वो हमें याद आएंगे।


तब कोई बात नहीं होगी,

और कोई रात नहीं होगी,

जग तब दोस्त बना होगा,

और तुम साथ नहीं होगी,

मन की पीड़ा तो होगी,


पर कोई वीणा नहीं होगी,

यहां हम अकेले ही होंगे,

और तुम साथ नहीं होगी,

यादें तब लौट आएंगे,

मेरा साथ निभाएंगे,

जब वो भूल जायेंगें,

वो हमें याद आयेंगे ।


मुझे तेरा साथ नहीं खोना,

शायद अब साथ नहीं रोना,

जब हो जाए दो कश्ती,

तो कैसे साथ हो होना,

हम उन यादों की दुनियां को,

तब पास बुलाएंगे,


उन्हीं में छोड़ा-सा घर करके,

उसी के साथ रह जाएंगे,

न उनको भूल पाएंगे,

ना ही भुला पायंगे,

जब वो भूल जायंगे,

वो हमें याद आएंगे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract