STORYMIRROR

Sonias Diary

Drama

3  

Sonias Diary

Drama

वक़्त

वक़्त

1 min
259

वक़्त चल रहा है 

हाथों से निकल रहा है 

बोले तुम कमसीन कली हो 

झूमो नाचो और नचाओ


 वक़्त चलता गया 

और एक वक़्त आया 

कली ब्याहता बन गयी 

तुम रुको झूमो नाचो नहीं

शांत रहो चुप रहो


वक़्त तब भी थमा नहीं 

वो तो बस गुज़रता गया 



माँ बनी माँ से नानी 

वक़्त चल रहा था तब भी 


श्वास भी थमी नहीं थी 

वो भी तो तब से ही 

चल रही थी 


काया बदली रंग रूप बदला 

रिश्ते नाते सब बदल गए 

बस वक़्त जो था वो 

चलता गया 

अपनी सुई और घंटों 

में आगे वो बड़ता गया 



श्वास और वक़्त का 

क्या अनमोल सा है रिश्ता 

कोमल इन हाथों से 

वक़्त है बीतता जाता 

और सुनहरी इस काया से 

ये श्वास है छूटता जाता


ज़िंदगी का सोनिया यही है खेला 

ये जो वक़्त है ना 

कभी किसी के हाथ नहीं आता

कभी किसी के हाथ नहीं आता ।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama