रूपेश श्रीवास्तव 'काफ़िर'
Abstract Inspirational Others
कल जो मेरा था, आज तेरा हो गया,
वक्त से पहले ही, अंधेरा हो गया।
हम यूँ ही परेशां थे तीरगी-ए-शब से,
बस रात गुजरी और सबेरा हो गया॥
मोहब्बत
सच
दोस्ती
खेल पुराना चल...
किस्मत
वतन मेरा
बात नहीं होगी...
मन का दीप जला...
सलाम
ध्यान
अपनी वेदना का हाल मैं भला कैसे कहूँ? अपनी वेदना का हाल मैं भला कैसे कहूँ?
लाल रंग की चुनरी मैया को खूब भाए। लाल-लाल पुष्प मस्तक व चरण पर शोभे। लाल रंग की चुनरी मैया को खूब भाए। लाल-लाल पुष्प मस्तक व चरण पर शोभे।
प्रियतमा हो! उनकी यह मान बैठी मन में, संगिनी बन धीरे – धीरे साथ में ढल रही हो प्रियतमा हो! उनकी यह मान बैठी मन में, संगिनी बन धीरे – धीरे साथ में ढल रही...
अब पता ही नहीं चलता कब उत्सव निकल गए. हर एक त्यौहार पर हम कितना छले गए. अब पता ही नहीं चलता कब उत्सव निकल गए. हर एक त्यौहार पर हम कितना छले गए.
ख्वाहिश यही, चरण रज बन जाऊं, जिस पथ चले सैनिक, वहाँ बिछ जाऊँ, ख्वाहिश यही, चरण रज बन जाऊं, जिस पथ चले सैनिक, वहाँ बिछ जाऊँ,
तुलसी, मीरा, कबीर या हो रसखान, हिंदी पर सबको है अभिमान। तुलसी, मीरा, कबीर या हो रसखान, हिंदी पर सबको है अभिमान।
चल पराजय की राह ही फतह हासिल होती है न मन डगमगाए तो सफलता हासिल होती है चल पराजय की राह ही फतह हासिल होती है न मन डगमगाए तो सफलता हासिल होती है
और तूमने गले लगा लिया तो उनके लिये तुम आशीष बन के आती हो और तूमने गले लगा लिया तो उनके लिये तुम आशीष बन के आती हो
मन की अंतर्दशा का क्या कहना, अंतर्द्वंद्व का जैसे ठिकाना हो। मन की अंतर्दशा का क्या कहना, अंतर्द्वंद्व का जैसे ठिकाना हो।
हिंदी भाषा से ही है हमें पहचान मिली जिसके बिना अस्तित्व कहां संभव है हिंदी भाषा से ही है हमें पहचान मिली जिसके बिना अस्तित्व कहां संभव है
कल्पनाओं के विस्तृत नभ को पारकर, जब जीवन की गहराई को माप सकूँ। कल्पनाओं के विस्तृत नभ को पारकर, जब जीवन की गहराई को माप सकूँ।
सौ साल की जगह.... मेरा जीवन भी केवल एक ही दिन का होता। सौ साल की जगह.... मेरा जीवन भी केवल एक ही दिन का होता।
सभी एक कहानी का हिस्सा हैं किसी का छोटा किसी का बड़ा हिस्सा है सभी एक कहानी का हिस्सा हैं किसी का छोटा किसी का बड़ा हिस्सा है
माँ बाप को घर से बाहर का रास्ता दिखाते इन प्राणियों में माँ बाप को घर से बाहर का रास्ता दिखाते इन प्राणियों में
सहज सरल यह है जन जन की भाषा, पूरी करती यह हम सबकी अभिलाषा। सहज सरल यह है जन जन की भाषा, पूरी करती यह हम सबकी अभिलाषा।
लड़की के बिना संसार नहीं। जिंदा है इन्हीं से यह धरती।। लड़की के बिना संसार नहीं। जिंदा है इन्हीं से यह धरती।।
शुभता का ये लाल रंग, मंगल करे जीवन ढंग, जोश और जुनून लेकर आये, पुलकित हो अंग अंग। शुभता का ये लाल रंग, मंगल करे जीवन ढंग, जोश और जुनून लेकर आये, पुलकित ह...
सदियों झेल रहे अपने हिस्से का सुख दुःख, तू पीड़ा के सागर में, सीप सी प्रीत लेना। सदियों झेल रहे अपने हिस्से का सुख दुःख, तू पीड़ा के सागर में, सीप सी प्रीत ले...
ममता से भरा दरिया, सागर से भी गहरा सागर है माँ। ममता से भरा दरिया, सागर से भी गहरा सागर है माँ।
सुने उनके गीत बहाएँ उनके गीतों की गंगा सजायें महफिलें सुने उनके गीत बहाएँ उनके गीतों की गंगा सजायें महफिलें