Jitendra Meena
Inspirational
"वक्त की कीमत" और
"अपनों की अहमियत"
समझने मे देर नही
करनी चाहिये ,
वक्त के साथ अपने
ही जिन्दगी मे
समय का महत्त्व
समझाते हैं ।
हम किसान है
कौन है ?
एक पत्रकार
बिक चुका तंत्...
भलाई की खोज
पागल
अपना और पराया
वक्त की अहमिय...
फौजी ( बच्चे ...
अकेला हूँ
वीतरागी बनकर काल दे रहा सबको निमंत्रण महामारी का रूप धरकर। वीतरागी बनकर काल दे रहा सबको निमंत्रण महामारी का रूप धरकर।
हाथ नहीं होते नसीब होते है उनके भी, तू मुट्ठी में बंद लकीरों को लेकर रोता है। हाथ नहीं होते नसीब होते है उनके भी, तू मुट्ठी में बंद लकीरों को लेकर रोता है।
खुद ही पनप गया बिना किसी अपनेपन के यही वजह काफी थी लोगों के थोथेपन की खुद ही पनप गया बिना किसी अपनेपन के यही वजह काफी थी लोगों के थोथेपन की
तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी,
महान वो इंसान होते हैँ जो दिल से सच्चे होते हैँ! महान वो इंसान होते हैँ जो दिल से सच्चे होते हैँ!
उस घर में खुशियां छाए, जिस घर में तुम्हारी पूजा हो। उस घर में खुशियां छाए, जिस घर में तुम्हारी पूजा हो।
हाथ थामने वालों के भी हौसले बुझते देखा है.. हाथ थामने वालों के भी हौसले बुझते देखा है..
विजयश्री तुमको मिलेगी। यूं ठहरना राहत दे भले ही, विजयश्री तुमको मिलेगी। यूं ठहरना राहत दे भले ही,
आ बैठ ज़रा.. पल-पल का मेरा हिसाब कर आ बैठ ज़रा.. पल-पल का मेरा हिसाब कर
अपने कोमल पंखों से दूर नभ तक भरती उड़ान। अपने कोमल पंखों से दूर नभ तक भरती उड़ान।
कितने नादानों ने मुँह अपना सिया होगा। कितने नादानों ने मुँह अपना सिया होगा।
अंग्रेजों के राज में जो लाया आंधी, वह है मेरा सबका प्यारा गाँधी। अंग्रेजों के राज में जो लाया आंधी, वह है मेरा सबका प्यारा गाँधी।
लाकडाउन जैसे ही खुला वैसे ही, लोग लापरवाह हो गए। लाकडाउन जैसे ही खुला वैसे ही, लोग लापरवाह हो गए।
कलम किसी को कभी कहाँ संतुष्ट कर पायी है कलम किसी को कभी कहाँ संतुष्ट कर पायी है
इंसानों के दिलों में एक पवित्र प्यार, मृत्यु ही विदा कर सकती है। इंसानों के दिलों में एक पवित्र प्यार, मृत्यु ही विदा कर सकती है।
जप तप ध्यान और साधना से बढ़ाओ मन की शक्ति जप तप ध्यान और साधना से बढ़ाओ मन की शक्ति
दिल तोड़कर बहुरूपिया छुप गए हैं बिल में दिल तोड़कर बहुरूपिया छुप गए हैं बिल में
माँ के जतन से ही सृष्टि पली है । माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है माँ के जतन से ही सृष्टि पली है । माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है
अपने हित को जो बस समझे, धिक्कार के ही पात्र है। अपने हित को जो बस समझे, धिक्कार के ही पात्र है।
वो जो हँसते थे कल संग .... क्या आज चले जायेंगे। वो जो हँसते थे कल संग .... क्या आज चले जायेंगे।