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Kavita Sharrma

Abstract

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Kavita Sharrma

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वज़ूद

वज़ूद

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बात कहीं दिल की दिल में ही रह गई 

 कहना चाहा पर हिम्मत न हुई

दुनिया क्या कहेगी, इसकी झिझक हुई

लड़की हो सहना होगा समझा दी गई


पर वक्त की पुकार है अब न सहो

लड़की हो तो क्या हक के लिए खड़ी रहो

बात जो दिल में रह गई थी बरसों

अब जग जाहिर हो गई


नई पहचान बनाने की ओर

नई उम्मीद मन में जग गई

अपने वजूद को तराशना है अब

मंजिल तक पहुंचने की वज़ह मिल गई।


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