विश्वास
विश्वास
विश्वास एक शब्द नहीं है,
रखना पड़ता है खुद पर,
दूसरे पर विश्वास बनाए रखने के लिए,
कभी डगमगाए जो ,
तो खुद को समझाना पड़ता है,
रिश्ता कोई भी हो,
मा बाप, भाई बहन ,
पति पत्नी , चाचा चाची
मौसा मौसी, प्रेमी प्रेमिका
या दोस्त कोई गहरा,
बिना विश्वास कोई नहीं ठहरा,
विश्वासघात करना आसान है,
अपनों को छलना बहुत आसान है,
विश्वास कोई चीज नहीं जो सब पर हो जाए,
विश्वास एक एहसास है जो खुद से होता है,
विश्वास आप कर भी किसी पर तभी सकते,
जब खुद किसी के विश्वास को चोट ना दिए हो,
विश्वासघात क्या होता ,
किसी को धोखा देना, नहीं किसी के आत्मसम्मान को गिरा देना ,
एक कहानी है परिकल्पना पर आधारित,
दो लोग दोनों घनिष्ठ मित्र,
कितने घनिष्ठ विश्वास की बात है,
तीसरा आया दो चार आग लगाई फिर भी ,
वो साथ रहे,
ये विश्वास है उनका एक दूसरे के प्रति,
दो लोग और है दोनों बहुत घनिष्ठ भी,
उनमें से एक, अपने मित्र के सामने कुछ और,
तीसरे के आगे कुछ और बन जाता, चौथे के आगे कुछ और,
वो अपनी मित्र की बाते सबसे बताता,
ये विश्वासघात है।
एक तरफ और दो लोग, दोनों घनिष्ठ भी,
ये दोनों एक दूसरे की बाते तीसरे से साझा करते,
तो ये विश्वास है कि विश्वासघात है ,
खुद ही फैसला कीजिए ।।
विश्वास कोई वस्तु नहीं जिसको किसी पलड़े से नापा जाए
विश्वास की बात करने से नहीं रखने से होती है,
यदि आप किसी से विश्वासघात करते हो ना,
तो आप अपने उस व्यक्ति पर भी शक करते हो ,जो आपके प्रति बहुत ईमानदार है।।
व्यक्ति वही विश्वास नहीं रख पाता किसी पर,
जो खुद लोगों के विश्वास को तोड़ने में वक्त नहीं लगाता,
पहले खुद किसी का विश्वास बनिए फिर विश्वास की बाते करिए।।
विश्वास केवल एहसास है,
ये खतम हुआ तो सब खतम हुआ।।
