STORYMIRROR

J P Raghuwanshi

Inspirational

3  

J P Raghuwanshi

Inspirational

विनम्रता

विनम्रता

1 min
354


विनय से विद्या आती,

विद्या से मिलती पात्रता।

पात्रता बिन धर्म नहीं,

सुख मिलता, सुख पाता।


विद्या से नम्रता आती,

नम्रता जीवनोपयोगी।

बड़े-बड़े काम बन जाते,

भोगी से बनते जोगी।


दृष्टिकोण को व्यापक करती,

पसरा तिमिर हटाती।

जैसे अंधेरे कक्ष में,

जले दिया और बाती।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational