भाऊराव महंत
Thriller
अंगारों में आग लगा दें, ऐसा कुछ कर जाते हैं।
पानी की भी प्यास जगा दें, ऐसा कुछ कर जाते हैं।
अपने सैनिक समर भूमि में भारत माता की ख़ातिर
आँधी को भी फूँक भगा दें ,ऐसा कुछ कर जाते हैं।
होली दोहा
आज हम होली मे...
होली दोहा 05
होली दोहा 03
होली दोहा 01
होली हाइकू
होली कुंडलिया...
शहर की ओर भाग रहा है गांव गांव ना रहा। शहर की ओर भाग रहा है गांव गांव ना रहा।
परिवारजनों को समझा रहा हूं मैं, शांत रहने के लिए कोई तैयार नहीं। परिवारजनों को समझा रहा हूं मैं, शांत रहने के लिए कोई तैयार नहीं।
मुझे हैवानियत आचरने वालों की नहीं "मुरली", मानवता की धारा बहाने वालों की तलाश है। मुझे हैवानियत आचरने वालों की नहीं "मुरली", मानवता की धारा बहाने वालों की तला...
रिश्तों से जीवन रंगीन होता है। रिश्तों से जीवन रंगीन होता है।
की मानवता आज ICU में है और संवेदना वेंटिलेटर पर..... और यह हमारे नैतिक पतन की पराकाष् की मानवता आज ICU में है और संवेदना वेंटिलेटर पर..... और यह हमारे नैतिक पतन क...
यादें ताकतवर होती है यादें ताकतवर होती है
"मुरली" घर दूसरे का बसाकर तूं, जीवन मेरा पतझड़ बना गई। "मुरली" घर दूसरे का बसाकर तूं, जीवन मेरा पतझड़ बना गई।
म हो तो मेरी कलममें जान है "मुरली", लेकिन तुम नहीं हो तो कलम ही सूमशान है। म हो तो मेरी कलममें जान है "मुरली", लेकिन तुम नहीं हो तो कलम ही सूमशान है।
चल सको तो चलो दो कदम, और भी ये रास्ते जो मिलते हैं कभी - कभी चल सको तो चलो दो कदम, और भी ये रास्ते जो मिलते हैं कभी - कभी
हजारों कहानियां है इतिहास में कहानी यां यूं ही दोहराती रहेगी। हजारों कहानियां है इतिहास में कहानी यां यूं ही दोहराती रहेगी।
अमरत्व का भी अंत होता है अमरत्व का भी अंत होता है
ना दुश्मन थी ना दोस्त थी ना दुश्मन थी ना दोस्त थी
कुछ तो कसूर है तेरे हुस्न का , मेरे इश्क का कोई कसूर नहीं। कुछ तो कसूर है तेरे हुस्न का , मेरे इश्क का कोई कसूर नहीं।
प्रेम संगीत का साधक हूं मुरली", प्रेम के सूर को बेसूरा मत कर। प्रेम संगीत का साधक हूं मुरली", प्रेम के सूर को बेसूरा मत कर।
ऐसी कोई जगह नहीं जहां नहीं होता है प्रेम। ऐसी कोई जगह नहीं जहां नहीं होता है प्रेम।
पेंटिंग जैसी बनती है जीवन वैसा हो जाता है। पेंटिंग जैसी बनती है जीवन वैसा हो जाता है।
इसके ही भीतर भाव भंगिमाएं होती है इसके ही भीतर भाव भंगिमाएं होती है
आँखों की जुबां जो कहना चाहे नेत्र कलम दिल पर लिख देती है। आँखों की जुबां जो कहना चाहे नेत्र कलम दिल पर लिख देती है।
प्रेम अपना कभी पराया सा हो जाता है प्रेम अपना कभी पराया सा हो जाता है
उत्तर का काम सिर्फ प्रश्न को संतुष्ट करना हीं है ये सारे प्रश्... उत्तर का काम सिर्फ प्रश्न को संतुष्ट करना हीं है ...