भाऊराव महंत
Thriller
अंगारों में आग लगा दें, ऐसा कुछ कर जाते हैं।
पानी की भी प्यास जगा दें, ऐसा कुछ कर जाते हैं।
अपने सैनिक समर भूमि में भारत माता की ख़ातिर
आँधी को भी फूँक भगा दें ,ऐसा कुछ कर जाते हैं।
होली दोहा
आज हम होली मे...
होली दोहा 05
होली दोहा 03
होली दोहा 01
होली हाइकू
होली कुंडलिया...
शत्रु का शोणित पीने को ले पवन, पवन के वेग उड़ी शत्रु का शोणित पीने को ले पवन, पवन के वेग उड़ी
ये कोशिश है उस नाम की तलाश की, एक औरत की तलाश की। ये कोशिश है उस नाम की तलाश की, एक औरत की तलाश की।
सांस जब तक रही धड़कन में, अंग्रेजो को मजा चखा दिए। सांस जब तक रही धड़कन में, अंग्रेजो को मजा चखा दिए।
सृष्टि स्वीकारे नहीं क्यों, दो 'पुरुष' का एक होना ? सृष्टि स्वीकारे नहीं क्यों, दो 'पुरुष' का एक होना ?
हम सावधानी बरते, वरना हमारी लापरवाही उसे फिर से आने का निमंत्रण दे सकता है ! हम सावधानी बरते, वरना हमारी लापरवाही उसे फिर से आने का निमंत्रण दे सकता है !
आदत लग जाने के भाव से अब तो मुझे डर लगता है। आदत लग जाने के भाव से अब तो मुझे डर लगता है।
देख जिसमें सकूँ मैं सनम आपको चाहते नैन जो आइना दे मुझे। देख जिसमें सकूँ मैं सनम आपको चाहते नैन जो आइना दे मुझे।
नहीं जो उड़ सका उसको भी सब परवाज़ बोलेंगे। नहीं जो उड़ सका उसको भी सब परवाज़ बोलेंगे।
धन्य हैं वो देशवासी जो भारत मां का नौजवान हैं। धन्य हैं वो देशवासी जो भारत मां का नौजवान हैं।
क्यूं ये समाज के ठेकेदार इनका मज़ाक उड़ाते है , क्यूं ये समाज के ठेकेदार इनका मज़ाक उड़ाते है ,
चढ़ता चला गया हिमालय, दुश्मन भी घबराया था, चढ़ता चला गया हिमालय, दुश्मन भी घबराया था,
एक भारत श्रेष्ठ सदा भारत गर्वित हम। एक भारत श्रेष्ठ सदा भारत गर्वित हम।
यक़ीन मानिये एक दिन बदलेगा ये संसार। यक़ीन मानिये एक दिन बदलेगा ये संसार।
दिल खुश हो जाएगा यहां आकर, आओ पर्यटको मनाली है निराली। दिल खुश हो जाएगा यहां आकर, आओ पर्यटको मनाली है निराली।
मान अपना जिसके दुर्गुण बोल डाले सामने 'देव' तुझसे सबसे ज्यादा अब वही नाराज़ है। मान अपना जिसके दुर्गुण बोल डाले सामने 'देव' तुझसे सबसे ज्यादा अब वही नाराज़ है...
तुम जो ठहरीं मां मेरी भारती मां मेरी भारती। तुम जो ठहरीं मां मेरी भारती मां मेरी भारती।
इस पुण्यधरा पर लें जन्म बारम्बार,यही अरमान हमारा है। इस पुण्यधरा पर लें जन्म बारम्बार,यही अरमान हमारा है।
उजाला बनकर रहना मेरे जीवन में, सुबह हो या शाम।। उजाला बनकर रहना मेरे जीवन में, सुबह हो या शाम।।
आपाधापी के दौर में रिश्तों की मिठास को चखने वाला बचपन पीछे छूट गया. आपाधापी के दौर में रिश्तों की मिठास को चखने वाला बचपन पीछे छूट गया.
आओ मनाये जश्न -ऐ-आज़ादी मुँह से कुछ न बोल कर। आओ मनाये जश्न -ऐ-आज़ादी मुँह से कुछ न बोल कर।