भाऊराव महंत
Thriller
अंगारों में आग लगा दें, ऐसा कुछ कर जाते हैं।
पानी की भी प्यास जगा दें, ऐसा कुछ कर जाते हैं।
अपने सैनिक समर भूमि में भारत माता की ख़ातिर
आँधी को भी फूँक भगा दें ,ऐसा कुछ कर जाते हैं।
होली दोहा
आज हम होली मे...
होली दोहा 05
होली दोहा 03
होली दोहा 01
होली हाइकू
होली कुंडलिया...
पर प्रकृति की क्रोध के आगे मनुष्य बड़ा लाचार है। पर प्रकृति की क्रोध के आगे मनुष्य बड़ा लाचार है।
मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।। मौसम का बदलना दस्तूर है, शायद दिल को भी ये कबूल है।।
मुझको क्या है ये दिल से पूछो पागल बनकर ये रोने लगा है मुझको क्या है ये दिल से पूछो पागल बनकर ये रोने लगा है
मेरी अपनी सल्तनत मेरा अपना राज अकेली मैं सम्राज्ञी, पूरी करूँ मन की प्यास, मेरी अपनी सल्तनत मेरा अपना राज अकेली मैं सम्राज्ञी, पूरी करूँ मन की प्यास,
लेकिन अपनी छाप यहां छोड़ना हैं, यादों में जीना, खुद को अमर करना हैं। लेकिन अपनी छाप यहां छोड़ना हैं, यादों में जीना, खुद को अमर करना हैं।
दो सिक्कों के लिए उसको गिरवीं रखते देखा है। दो सिक्कों के लिए उसको गिरवीं रखते देखा है।
यूँ इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारी कहानी को … उस के शब्दों को आबाद करेंगे यूँ इस दुनिया से जाने के बाद भी हमारी कहानी को … उस के शब्दों को आबाद करेंगे
राज छुपाया कुंती ने, जो नहीं छुपाना चाहिए, राज छुपाया कुंती ने, जो नहीं छुपाना चाहिए,
तू तो एक सपनों का खिलाड़ी था शातिर। तू तो एक सपनों का खिलाड़ी था शातिर।
जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है …. जिसे मैंने जाना …… यशवी और उसने समझाया है ….
हम उनका सोचा करते थे , दिल से निभाया करते थे l हम उनका सोचा करते थे , दिल से निभाया करते थे l
जवान बेटे पर हाथ जैसे बाप का नहीं चलता। जवान बेटे पर हाथ जैसे बाप का नहीं चलता।
लबादा फैला कर, आराम से बैठ कर गंदी-मटमैली गठरी खोल कर चाँद की मोटी, रोटी निकाली थी लबादा फैला कर, आराम से बैठ कर गंदी-मटमैली गठरी खोल कर चाँद की मोटी, रोटी...
महज सांसों का रुक जाना, नहीं होता है बुराई का अंत, महज सांसों का रुक जाना, नहीं होता है बुराई का अंत,
क्या मेरी तरह वह भी तेरे ना कमाने पर खुद से घर खर्च उठाता है? क्या मेरी तरह वह भी तेरे ना कमाने पर खुद से घर खर्च उठाता है?
भूखी मरती चली गई, क्या हसीन चेहरा, लगता थी कि देवता भी, देते आये पहरा।। भूखी मरती चली गई, क्या हसीन चेहरा, लगता थी कि देवता भी, देते आये पहरा।।
मैं तुमको अपना बनाने आ रहा हूँ हमेशा हमेशा के लिए बस तुम मेरा इंतज़ार करना। मैं तुमको अपना बनाने आ रहा हूँ हमेशा हमेशा के लिए बस तुम मेरा इंतज़ार करन...
वो जवानी कहां? वो कहानी कहां? जो प्रेम में बुझ गई। वो जवानी कहां? वो कहानी कहां? जो प्रेम में बुझ गई।
जिसकी ये पटकथा है हाँ वहीं लाचार मज़दूर हूँ। जिसकी ये पटकथा है हाँ वहीं लाचार मज़दूर हूँ।
अभी नादान है दिल कुछ समझता नहीं है इश्क की छांव में थोड़ा बड़ा तो होने दीजिए। अभी नादान है दिल कुछ समझता नहीं है इश्क की छांव में थोड़ा बड़ा तो होने दीजिए।