भाऊराव महंत
Thriller
अंगारों में आग लगा दें, ऐसा कुछ कर जाते हैं।
पानी की भी प्यास जगा दें, ऐसा कुछ कर जाते हैं।
अपने सैनिक समर भूमि में भारत माता की ख़ातिर
आँधी को भी फूँक भगा दें ,ऐसा कुछ कर जाते हैं।
होली दोहा
आज हम होली मे...
होली दोहा 05
होली दोहा 03
होली दोहा 01
होली हाइकू
होली कुंडलिया...
विचार है तो फिर वो मानव कहां है वह तो आधा इंसान और आधा दानव है। विचार है तो फिर वो मानव कहां है वह तो आधा इंसान और आधा द...
खुद को मैंने बहुत अकेला पाया, जब मैंने किसी खास को खोया। खुद को मैंने बहुत अकेला पाया, जब मैंने किसी खास को खोया।
कौन था जिसे पता थी मेरी पसंद बचपन की कौन था जिसे पता थी मेरी पसंद बचपन की
मेरे इर्दगिर्द रहा करो ना मुझमें तेरी ये खनक अच्छी लगती है। मेरे इर्दगिर्द रहा करो ना मुझमें तेरी ये खनक अच्छी लगती है।
हमेशा बनाए रखें आप अपने भक्तों का अधिकार, सदा समर्थ और बलवान हो जय हनुमान। हमेशा बनाए रखें आप अपने भक्तों का अधिकार, सदा समर्थ और बलवान हो जय हनुमान।
ऐसा आता है घाव अस्तित्वहीन हो जाता है। ऐसा आता है घाव अस्तित्वहीन हो जाता है।
हार अधूरा होता है जीत भी अधूरी होती है हार अधूरा होता है जीत भी अधूरी होती है
पिछे रहने वालों के कान जाने चले जाते है कंहा ।। पिछे रहने वालों के कान जाने चले जाते है कंहा ।।
कहीं तो कमी रहती है ना जाने कमी कहाँ रह जाती है। कहीं तो कमी रहती है ना जाने कमी कहाँ रह जाती है।
पिता थे उसके महर्षि कश्यप करते रहते भक्ति और तप पिता थे उसके महर्षि कश्यप करते रहते भक्ति और तप
यह पता नहीं चल पाता है। यह पता नहीं चल पाता है।
नजरें चेहरे आवाज गतिविधियां सब बता देती है। नजरें चेहरे आवाज गतिविधियां सब बता देती है।
मां नहीं है समर्पण नहीं है। मां नहीं है समर्पण नहीं है।
उन्हें नहीं सुधार सकते तो क्या, हम खुद अच्छे रिश्तेदार बन लेते हैं। उन्हें नहीं सुधार सकते तो क्या, हम खुद अच्छे रिश्तेदार बन लेते हैं।
सही मायने में वही है कविता। सही मायने में वही है कविता।
अपलक सवालों की तरफ पथराई आंखो से देख रहा था निःशब्द। अपलक सवालों की तरफ पथराई आंखो से देख रहा था निःशब्...
उस राष्ट्र के नेताओं को खा जाती है बेबस और लाचार जन की हाय। उस राष्ट्र के नेताओं को खा जाती है बेबस और लाचार जन की हाय।
नफरतें समस्या बढ़ाती हैं परेशानियां बढ़ाती है। नफरतें समस्या बढ़ाती हैं परेशानियां बढ़ाती है।
बिखर गया सामान -ओ-असबाब परिंदा उड़ चला तोड़ के मेहराब। बिखर गया सामान -ओ-असबाब परिंदा उड़ चला तोड़ के मेहराब।
यूँ जीयो और चलते चले जाओ ना रुको कभी ना रुकने का कभी पैग़ाम सुनाते जाओ ….. यूँ जीयो और चलते चले जाओ ना रुको कभी ना रुकने का कभी पैग़ाम सुनाते ज...