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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Classics Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Abstract Classics Inspirational

वह सफेद रंग

वह सफेद रंग

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एक विधवा स्त्री के दुख का साक्षी

वह सफेद रंग 


सफेद चुनरी का वो झीना आँचल 

जिसमें छुपा है दर्द का नम बादल  

आँखों में नमी, पलकों पर शिकन 

हर पल बेकरारी कैसी अजब घुटन


पति के जाने का गम बड़ा विशाल

हर सांस में बोझिल सिर्फ़ बेहाल 

समाज की रूढ़ियों का बोझ भारी  

हर पल ऐसे टूटती समाज में नारी


सफेद रंगी ये चादर है उसकी पीड़ा 

फिर भी उठा लेती है चुनौती बीड़ा

हर पल याद आती बीती प्यारी यादें

जिसके बिन जीवन की अधूरी साधें


फिर भी हार नहीं मानती वह नारी

जीवन संघर्षों से लड़े अकेली हारी

अपने बच्चों का भविष्य ही मंजिल 

मुश्किल का सामना करती साहिल


सफेद रंग में भी एक अनोखी चमक  

जो उसकी अदम्य शक्ति की गमक  

वो बन प्रेरणा सभी नारियों के लिए

सिखाये जीने का हौसला,ज्योति दिये।


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