वह मेरे गुरु कहलाते है
वह मेरे गुरु कहलाते है
मिट्टी के गोले को उन्होंने खुब सजाया
नादान बच्चों को उन्होंने काबिल इंसान बनाया,
पौधे के एक बीज से उन्होंने, रंगीन फूलों के बाग सजाए
कोई और नहीं वह हमारे गुरु शिक्षक कहलाए !!
होते है जिंदगी के दो पहलू वो हमें उन्होंने सिखाए.
हार जीत तो हिस्सा है जिंदगी के खेल का यह भी बतलाया,
माँ-पिता ने तो हमें चलना सिखाया,
जिंदगी का सही मायना हमें हमारे गुरु शिक्षकों ने बताया।।
कभी गुरु बनकर मार्ग दिखाया
कभी माता-पिता का भी फर्ज निभाया,
दो किस्त बनकर हौसला खुब बढ़ाया,
धन्यवाद मेरे गुरु को, आपने हमें इस मुकाम पर खड़े होने के काबिल बनाया !!
सूरज जैसे चमकना है, तो उस जैसे जलना भी होगा
कर्ण जैसा बनना है तो, परशुराम का शिष्य काबिल बनना होगा,
अ अज्ञानी से ज्ञ ज्ञानी तक का सफर तय करना होगा,
गुरु को दान में विद्या धन अमूल्य देना ही होगा !!
