वह अमीर है और मैं गरीब
वह अमीर है और मैं गरीब
खाने को रोटी न हो
पहनने को कपड़ा न हो
रहने को मकान न हो
बच्चों के लिए शिक्षा न हो
स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो
इन मूलभूत सुविधाओं का अभाव
गरीबी कहलाता है
वह एक पांच सितारा होटल में चाय पीता है और
मैं एक ढाबे पर
वह अमीर है और
मैं गरीब
वह ट्रेन के एसी कोच में सफर करता है और
मैं सामान्य श्रेणी के डिब्बे में
वह ब्रांडेड वस्तुओं का इस्तेमाल अपनी रोजमर्रा की
जिंदगी में करता है और
मैं फुटपाथ के किनारे लगे सप्ताहिक बाजार से सामान खरीद कर
अपना काम चलाता हूं
वह संडे आइसक्रीम खाता है और
मैं पांच रूपये की चुस्की
वह कार से अपना सफर तय करता है और
मैं साइकिल से या पैदल चलता हूं
वह एक अच्छे और नामी सैलून में
बाल कटवाता है और
मैं एक सड़क किनारे पेड़ के नीचे बैठे नाई से
वह हर दिन किसी फंक्शन में जाता है और
नई नई डिजाइनर ड्रेसेस पहनता है और
मैं घर में बंद
कभी कहीं जाना पड़े तो वही घिसे पिटे
अपने एक या दो जोड़ी कपड़े दोबारा,
तीबारा पहनना और वह भी बिना प्रेस के
ऐसे उदाहरणों की कोई कमी नहीं लेकिन
एक सामान्य जीवन जीना कोई गरीबी नहीं
चाय चाय होती है चाहे उसे कहीं भी
पीया जाये
सफर की अपनी मंजिल होती है फिर चाहे वह
जैसे भी तय किया जाये
तन ढकने के लिए बस कपड़ा चाहिए जो
आप पर फबता हो
उसकी कीमत से क्या लेना देना
दूसरे क्या कर रहे हैं
यह न देखकर खुद में संतुष्ट रहना सीखना
चाहिए
आय के साधन नहीं बढ़ सकते हों तो
फिजूल के खर्चों पर लगाम लगाकर
एक सामान्य, संतुलित एवं सफल जीवन
जीने की कोशिश करनी चाहिए
कार से बेहतर साइकिल से या पैदल
चलना है जो स्वास्थ्य के लिए उत्तम है
पैसे का अभाव होगा तो भोजन भी पौष्टिक ही
पेट में जायेगा
जंक फूड का खर्चा तो
एक तंग हाथ वाला उठा ही नहीं पायेगा
यह फिर आपके लिए
लाभप्रद है
एक कमरे का घर हो चाहे
उसमें कमरे हो हजार
सोना एक ही पलंग पर है तो
पैसे का इतना लालच क्यों
भौतिकतावाद की दौड़ में इतना क्यों
उलझा है आज का मानव
क्या सुख पाता है वह अंत में
अपने जीवन के आखिरी पड़ाव पर
धन की अधिकता उसे हर तरह से
नष्ट कर देती है कई बार
धन कम हो लेकिन उसका
सदुपयोग हो
अपव्यय न हो
धन का संचयन हो तो
गरीबी का नाश काफी हद तक
संभव है।
