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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

4  

Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

उनके चेहरे का नूर

उनके चेहरे का नूर

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सुबह उठते है तो देखा उनका नूर, 

शाम को जब देखा ही उनका नूर। 


रात्रि को जब भी देखा उनका नूर, 

सूरज चाँद अमावस लगता हुज़ूर। 


सुबह न देखा उनके चेहरे का नूर, 

शाम न देखा उनके चेहरे का नूर। 


रात ना देखा उनके चेहरे का नूर, 

सूर्य चाँद तब फ़ीके दिखते हुज़ूर। 


वो मेरे चौदहवीं का चाँद है सुंदर, 

नील गगन का चाँद फ़ीका हुज़ूर। 


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