STORYMIRROR

Gangotri Priyadarshini

Abstract

3  

Gangotri Priyadarshini

Abstract

उम्मीद

उम्मीद

1 min
245


खुशियां खुद समेटती हुई

नई राह की आरज़ू लिए !!

चारों और दिलासा की 

जगमगाती रोशनी लिए !!

हम चल पड़े देखो यारों

जिंदगी की और कुछ पल

यादगार बनाने के लिए !!

ऐ हालात,

तू भी क्या याद रखेगा ??

तू भी खड़ा है ,

मेरी बुलंद हौसले के पीछे !!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract