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Isha Mudgal

Abstract

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Isha Mudgal

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तू ज़िंदा है

तू ज़िंदा है

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तू कुछ कहे या न कहे,

मेरे दिल में तेरी हर बात ज़िंदा है।

तू दिखे या न दिखे,

मेरे कानों में तेरी आवाज़ ज़िंदा है।

तू आया है आज इस तिरंगे में लिपटे

हर हिंदुस्तानी के अंदर तेरी साँस ज़िंदा है

हर नौजवान के अंदर तेरा जोश ज़िदा है।।


तू बिन सोचे क्या होगा आगे चल पड़ता है।

निकल जाता है,

उन रास्तो पर जहाँ कब क्या हो 

किसी को भी नहीं है खबर।।


लिए काँधे पर बस्ता 

तू चुन लेता है वो कठिन रास्ता।

हर कदम निडर होकर चल सके,

इसलिए तू अपने कदम दौड़ाता है।

तू इसीलिए नौजवान कहलाता है।।


फर्क नहीं पड़ता तुझे

कि तू इस मिट्टी के वास्ते इसी मिट्टी में मिल जाए।

तेरा सपना ही रहता है ये कि तू देश के लिए मर मिट जाए।

तुझे फर्क नहीं पड़ता कि देश की सुरक्षा के लिए तू शहीद हो जाए

इसीलिए तू नौजवान कहलाए।।


तू कुछ कहे ना कहे

मेरे दिल में तेरी हर बात ज़िंदा है।

तू दिखे या ना दिखे

मेरे कानों में तेरी आवाज़ ज़िंदा है।

तू आया है आज इस तिरंगे में लिपटे

हर हिंदुस्तानी के अंदर तेरी गाथा ज़िंदा है।

हर देशवासी के अंदर तेरा जुनून ज़िंदा है।।


तू था तू रहेगा

तेरा नाम हर दिल में बसता है।

तू देश के लिये जिया

उसी के लिये मिट गया

हर नौजवान के अंदर तेरा बलिदान ज़िंदा है।।

तू ज़िंदा है।।



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