सौरभ कृष्णवंशी
Abstract
मैं दिपक की बुझती लौ सा
वो तेज हवा का झोंका सा
मैं कच्चे मिट्टी के बर्तन सा
वो बूँदो के झरोखे सा
मैं कश्ती कोई मझधार बीच
वो मदमस्त लहर कोई
मैं एक मुसाफिर भटका सा
वो बिसरी यादों का शहर कोई।
तू और मैं
कोरोना का कहर
आतंकवादी कोरो...
मेरे वो दिन
संघर्ष ही जीव...
संघर्ष
जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस धर्म दस द जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस ...
गणपति आज कृपा की बारी। जीवन बहुत लगे अब भारी।। गणपति आज कृपा की बारी। जीवन बहुत लगे अब भारी।।
चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते। चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते।
इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई। इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई।
तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हारे पैरों के नीचे एक ... तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हा...
हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया । हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया ।
अरे मन से पुकारो, फिर देखो, हम तुम्हारे पास हैं, साथ हैं। अरे मन से पुकारो, फिर देखो, हम तुम्हारे पास हैं, साथ हैं।
जो नष्ट होता है वह भ्रमजाल है वियोग- मायाजाल जब हम अपने भ्रम को स्वीकार कर लेते हैं ... जो नष्ट होता है वह भ्रमजाल है वियोग- मायाजाल जब हम अपने भ्रम को स्वी...
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो। पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो।
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
समय आज फिर आ गया, करने को मतदान। सोच समझ कर कीजिए, मत बनिए अज्ञान।। समय आज फिर आ गया, करने को मतदान। सोच समझ कर कीजिए, मत बनिए अज्ञान।।
दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है। दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है।
हमने अंग्रेज़ी में सोचना सीख लिया है, पर हम महसूस हिंदुस्तानी में करते हैं. हमने अंग्रेज़ी में सोचना सीख लिया है, पर हम महसूस हिंदुस्तानी में करते हैं.
थम सी जाती ज़िन्दगी और समय चक्र मुस्कुराता कहीं थम सी जाती ज़िन्दगी और समय चक्र मुस्कुराता कहीं
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
शब्दों की अपनी गरिमा है, भावों की अनुपम महिमा है। मृदु मंत्रों के पुष्पहार से, अनघ हृद... शब्दों की अपनी गरिमा है, भावों की अनुपम महिमा है। मृदु मंत्रों के पुष्...
ज्येष्ठ श्रेष्ठ जो लोग हैं, कब करते हैं क्रोध। पथ दिग्दर्शन वे करें, सत्य कराते बोध।। ज्येष्ठ श्रेष्ठ जो लोग हैं, कब करते हैं क्रोध। पथ दिग्दर्शन वे करें, सत्य करा...
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बेटियाँ। शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बे...