तुम्हारी अनुपस्थिति
तुम्हारी अनुपस्थिति
जब तुम्हें मेरे साथ जागना चाहिए था
तब तुम हर बार एक गहरी नींद में थी
मैं घुटनों पर सर रख के बैठा
करता रहा इंतज़ार तुम्हारे जागने का रात भर
जब तुम्हें थामना चाहिए था मेरा हाथ कस कर
तब तुम्हारे हाथों ने फूल थाम रखे थे
मेरे हाथ अपने फूल न होने पर
तुम्हारे हाथों से इंच भर की दूरी से
हर बार उदास और खाली लौट आए मेरी जेबों में
तुम्हें रोना चाहिए था जब मेरे साथ बैठ कर
तब तुमने क हेमन्त परिहारजब तुम्हें मेरे साथ जागना चाहिए था
तब तुम हर बार एक गहरी नींद में थी
मैं घुटनों पर सर रख के बैठा
करता रहा इंतज़ार तुम्हारे जागने का रात भर
जब तुम्हें थामना चाहिए था मेरा हाथ कस कर
तब तुम्हारे हाथों ने फूल थाम रखे थे
मेरे हाथ अपने फूल न होने पर
तुम्हारे हाथों से इंच भर की दूरी से
हर बार उदास और खाली लौट आए मेरी जेबों में
तुम्हें रोना चाहिए था जब मेरे साथ बैठ कर
तब तुमने कहा ख़ुश रहना सीखो
मेरे वो आँसू जिनका नमक
तुम्हारी छाती पर जमना चाहिए था प्रेम बन कर
वो सारे जमीन पर गिरे
और स्वादहीन हो गए
तुम्हारी अनुपस्थिति,
किसी काई की तरह जमती रही वहाँ
फिर एक दिन तुम जागी अचानक नींद से
और कहा चलो...
लेकिन इंतज़ार से अकड़े मेरे घुटनों से
मैं उठ नही पाया
तुमने हाथ बढ़ाया,मेरे हाथ तब भी
इंच भर दूरी से लौट आए वापस
तुमने रोते हुए कहा-आओ मेरे सीने से लग जाओ
मैंने कोशिश की उठने की लेकिन
जमीन पर गिरे मेरे आंसुओं से जमी काई पर
फिसल कर गिर गया
और फिर कभी नहीं उठ पाया।
हा ख़ुश रहना सीखो
मेरे वो आँसू जिनका नमक
तुम्हारी छाती पर जमना चाहिए था प्रेम बन कर
वो सारे जमीन पर गिरे
और स्वादहीन हो गए
तुम्हारी अनुपस्थिति,
किसी काई की तरह जमती रही वहाँ
फिर एक दिन तुम जागी अचानक नींद से
और कहा चलो...
लेकिन इंतज़ार से अकड़े मेरे घुटनों से
मैं उठ नही पाया
तुमने हाथ बढ़ाया,मेरे हाथ तब भी
इंच भर दूरी से लौट आए वापस
तुमने रोते हुए कहा-आओ मेरे सीने से लग जाओ
मैंने कोशिश की उठने की लेकिन
जमीन पर गिरे मेरे आंसुओं से जमी काई पर
फिसल कर गिर गया
और फिर कभी नहीं उठ पाया।
