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Jyoti Deshmukh

Romance

4  

Jyoti Deshmukh

Romance

तुम जा सकते कभी नहीं

तुम जा सकते कभी नहीं

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वह मूक नज़र के आमंत्रण 

पलकों का वह उत्थान पतन 

निःशब्द प्रेम की वो बाते 

वह प्रेम का निश्छल पागलपन 

हर सुबह मधुर मुस्कान लिए 

हर शाम मिलन अरमान लिए 

टकटकी वह तुम्हारी अपलक 

मानो नैनो ने प्राण लिए 

दिन प्रतिदिन प्रेम उपहार लिए 

दिन प्रतिदिन अधिक इंतजार लिए 

तुम तनी क और न ठहर सके 

चल दिये मुझे बिना खबर किए 

पर तुम जा सकते कभी नहीं 

आजीवन इस अंतर्मन मन से 

इसका कारण है इक विशेष 

क्योंकि सुमधुर है स्मृति शेष।



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