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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance

तुम हो तो हम हैं

तुम हो तो हम हैं

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मेरी दुनिया बस तुमसे ही है 

जो तुम नहीं तो कुछ नहीं है 

तेरे साथ होने से मैं जीता हूँ 

नैनों से प्रेम पियाले पीता हूं 

मुस्कान से गुलाब सा खिलता हूँ 

दुआओं में अरमान सा पलता हूँ 

माथे की बिन्दिया राह बताये 

झुकी पलकें दिल की थाह बताये 

तेरी बांहों के हार में जन्नत है 

बस , एक तू ही मेरी मन्नत है 

चूड़ियों की सरगम प्यास जगाये 

पायल की छमछम पास बुलाये 

मेंहदी भरे हाथों की खुशबू 

हर जनम में तू यही जुस्तजू 

बातों में तेरी झरनों सी ताजगी

सेवा में तेरी लगती है बंदगी 

तेरे दम से जानम, मेरा दम है 

बस ये जान लो कि तुम हो तो हम हैं. 


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