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Mayank Kumar

Abstract

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Mayank Kumar

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तुम चले जाओगे

तुम चले जाओगे

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तुम चले जाओगे

ढेर सारी बातों को छोड़कर

आज के आधे पहर में

आधे सपने देकर,


कुछ यादों को ले जाओगे

जो जिया था हमने

तालाबंदी में 51 दिनों को

51 किस्सों के साथ

उन्हीं किस्सों में खो जाओगे


तुम चले जाओगे

ढेर सारी बातों को छोड़कर

कभी मौका मिले तो

तालाबंदी में बिताएं


उसी 51 दिनों में लौटना

अपने अपने बचपन सा

जब हम करेंट अफेयर्स सा थे

लेकिन हम कर भी क्या सकते हैं


दिन का सरकार बदलना ही था

जो खामोशी से बदल रहा

फिर से यादों में एक याद

अपना पांव फैला रहा 


तुम चले जाओगे

ढेर सारी बातों को छोड़कर।


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