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Reetesh Sharma

Romance

3  

Reetesh Sharma

Romance

तुम अच्छे लगने लगे हो

तुम अच्छे लगने लगे हो

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वो जो तोड़ा है तुमने मेरे मन के भ्रम को

मुझे तबसे तुम अच्छे लगने लगे हो।

वो मुस्कुरा के जो करते हो

तुम साथ होने का छलावा 

मुझे तबसे तुम अच्छे लगने लगे हो।


वक़्त नासाज़ और नाज़ुक हालात है

जो मेरे, वो देखकर जो तुम बदले हो

मुझे तबसे तुम अच्छे लगने लगे हो।


मैं खुश हूं कि जमाने ने देखा है

इन रिश्तों के रंगों को बदलते हुए,

वो जो परिहास कर जबसे मुस्कुराने लगे हैं

तबसे तुम अच्छे लगने लगे हो।


कि तुम आओ न आओ

अब साथ मेरे कोई फिक्र नहीं।

कि अब मेरे या तेरे होठों पर

इसका कोई जिक्र नहीं।


इस बेहतरबी से छोड़ा है

जो तुमने साथ मेरा

तबसे तुम अच्छे लगने लगे हो।


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