तराज़ू के एक तरफ बाट रखना
तराज़ू के एक तरफ बाट रखना
अगर दोगे नफ़रत तो नफ़रत मिलेगी ;
कैसे भला किसी की,मुहब्बत मिलेगी !
नज़र को नज़र से,चुराना भी सीख लो ;
तभी तो उसके दिल में,हिरासत मिलेगी !
सपनों ने लूट लिया सबको इस तरह ;
कभी तो हकीकत में,हकीकत मिलेगी !
अपने पैरों पर खड़े हो,खुद के दम पर ;
तुम बाट में हो कि कोई वसीयत मिलेगी !
माता, पिता को मान लो अगर खुदा तुम ;
तो देखना तुम्हें ज़रूर बरक्क़त मिलेगी !
कूद रहे हो इश्क के मैदान में तो सोच लो ;
आगे फ़क़त कोई हसीन सी मुसीबत मिलेगी !
अपने मुल्क के लिए हो जाओ कुर्बान यारा ;
तभी तुम्हें सबके दिलों में ,सच्ची इज्जत मिलेगी !
