STORYMIRROR

Kunal Gupta

Abstract

4  

Kunal Gupta

Abstract

तिरंगा

तिरंगा

2 mins
59

ये तिरंगा ये तिरंगा ये हमारी शान है।    

विश्व भर में भारती की ये अमिट पहचान है।

ये तिरंगा हाथ में पग निरंतर ही बड़े।    

ये तिरंगा दिल की धड़कन ये हमारी जान है।


 ये तिरंगा विश्व का सबसे बड़ा जनतंत्र है। 

ये तिरंगा वीरता का गूंजता इक मंत्र है।

ये तिरंगा वंदना है भारती का मान है। 

 

ये तिरंगा विश्व जैन को सत्य का संदेश है।    

ये तिरंगा कह रहा है अमर भारत देश है।  

ये तिरंगा इस धरा पर शांति का संधान है। 

        

इसके रेशों से बुना बलिदानीयों का नाम है।

ये बनारस की सुबह येआवध की शाम है। 

ये तिरंगा ही हमारे भाग्य का भगवान है

         

 ये कभी मंदिर कभी ये गुरु का द्वार लगे 

चर्च का गुबंद कभी मस्जिद का मीनार

लगे ये तिरंगा धर्म की हर राह का सम्मान है।

         

ये तिरंगा बाईबल है भागवत का श्लोक हैं

ज् ये तिरंगा आयत-ए-कुरआन का आलोक है।

ये तिरंगा वेद की पावन ऋचा का ज्ञान है।

       

ये तिरंगा स्वर्ग से सुंदर धरा कश्मीर है।   

ये तिरंगा झूमता कन्याकुमारी नीर हैं।     

ये तिरंगा मां के होठों की मधुर मुस्कान है।

        

ये तिरंगा लता की इक कुहूकती आवाज हैं। 

ये रविशंकर के हाथों में थिरकता साज़ है।

टैगोरके जनगीत जनगणमन का ये गुणगान है ।

        

ये तिरंगा गांधीजी की शांति वाली खोज है।

ये तिरंगा नेताजी के दिल से निकलाओज है।

ये विवेकानंद जी का जगजयी अभियान है।


रंग होली के हैं इसमें ईद जैसा प्यार है। 

चमक क्रिसमस की लिए ये दीपसा त्यौहार है  

 ये तिरंगा कह रहा ये संस्कृति महान है।   


ये तिरंगा अंडमान काला पानी जेल है।    

ये तिरंगा शांति और क्रांति का अनुपम मेल है

वीर सावरकर का ये इक साधना संगान है।


ये तिरंगा शहीदों का जलियांवाला बाग है। 

ये तिरंगा क्रांतिवाली पुण्य पावन आग है।

क्रांतिकारी चंद्रशेखर का ये स्वाभिमान है।


कृष्ण की ये नीति जैसा राम का वनवास है।

आद्य शंकर के जतन सा बुद्ध का संयास हैं।

महावीर स्वरुप ध्वज ये अहिंसा का गान है।


रंग केसरिया बताता वीरता ही कर्म है।   

श्वेत रंगे कह रहा है शांति ही धर्म है।     

हरे रंग के स्नेह से ये मिट्टी ही धनवान है।


ऋषि दयानंद के ये सत्य का प्रकाश है‌।

महाकवि तुलसी के पुज्य राम का विश्वास है।

ये तिरंगा वीर अर्जुन और ये हनुमान है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract