Sudhir Srivastava
Inspirational
तहरीर में जो लिखा
जीवन की तहरीर में जो लिखा है
उसे स्वीकारना तो पड़ेगा ही,
मगर उठिए और ठान लीजिए
अपने कर्मों से उसे बदलने का
निश्चय कर आगे बढ़िये,
तहरीर में जो लिखा है बदल डालिए।
नववर्ष का मौन...
नववर्ष की औपच...
नववर्ष और यमर...
बेचारा यमराज
मायूसी
रोग वाली बदलियाँ छट जाएंगी बस योग कर तितलियां उत्साह की मंडराएंगी बस योग कर. रोग वाली बदलियाँ छट जाएंगी बस योग कर तितलियां उत्साह की मंडराएंगी बस योग कर.
आज आठ दशक और हो गया है नौवें में प्रवेश। आज आठ दशक और हो गया है नौवें में प्रवेश।
अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी अमर रहेगी गोरा बादल की कहानी बोल रही मिट्टी राजस्थानी
भले वीर की देह पूरी हुई लहूलुहान है हे वीर तुम्हारी वीरता को मेरा हृदय से प्रणाम है। भले वीर की देह पूरी हुई लहूलुहान है हे वीर तुम्हारी वीरता को मेरा हृदय से प्र...
हां मैं वहीं हिन्दुस्तान हूं, मैं हर एक फौजी की जान हूं। हां मैं वहीं हिन्दुस्तान हूं, मैं हर एक फौजी की जान हूं।
प्रथम प्रणाम उन मात-पिता को, जिन्होंने मुझको जन्म दिया। प्रथम प्रणाम उन मात-पिता को, जिन्होंने मुझको जन्म दिया।
अदम्य साहस धैर्य भुजबल, भारत माता के सपूत। अदम्य साहस धैर्य भुजबल, भारत माता के सपूत।
यह युद्ध किसी समस्या का अंत नहीं होता मानवता यही पुकारती है. यह युद्ध किसी समस्या का अंत नहीं होता मानवता यही पुकारती है.
पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में। पिंजरे की चिड़िया थी सोने के पिंजरे में। वन की चिड़िया थी वन में।
उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ही तो मेरी जागीर है।.... उसकी फ़ितरत इंसानों से अलग है, वो आख़िरी साँस तक साथ निभाऐगी।हाँ सच ही तो, याद ह...
सुर्ख जहाँ केवल रक्त नहीं,भूमि भी जहाँ की लाल हुई थी। सुर्ख जहाँ केवल रक्त नहीं,भूमि भी जहाँ की लाल हुई थी।
एक भाषा बोली, समझी जाए जरूरत थी आन पड़ी अंग्रेजों ने विदेशी शिक्षा का प्रसार बड़ा किया एक भाषा बोली, समझी जाए जरूरत थी आन पड़ी अंग्रेजों ने विदेशी शिक्षा का प्रसार ...
कहने को आज राखी से सजी थाली है पर वक़्त आजकल एहसासों से खाली है. कहने को आज राखी से सजी थाली है पर वक़्त आजकल एहसासों से खाली है.
खुशी के हर पल बिखरे कभी लोरी, कभी आंख-मिचोली में खुशी के हर पल बिखरे कभी लोरी, कभी आंख-मिचोली में
हिन्दी भाषा में अथाह कोष के, सजीव दर्शन दे जाता है। हिन्दी भाषा में अथाह कोष के, सजीव दर्शन दे जाता है।
जीवन पथ पर चला पथिक ना जाने तू किधर चला। जीवन पथ पर चला पथिक ना जाने तू किधर चला।
“अपना हाथ जगन्नाथ”, बूझ लो तुम इस बात का सार। “अपना हाथ जगन्नाथ”, बूझ लो तुम इस बात का सार।
खेलते तो सभी हैं ताश, करते रहते हैं अपना मनोरंजन। खेलते तो सभी हैं ताश, करते रहते हैं अपना मनोरंजन।
माना मनुष्य है पृथ्वी पर ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना । माना मनुष्य है पृथ्वी पर ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना ।
जी ठीक समझा आपने, वो मेरे पिता थे। जी ठीक समझा आपने, वो मेरे पिता थे।