थक सा गया हूँ
थक सा गया हूँ
थक सा गया हूँ
ऐ जिंदगी खुदको समझाते समझाते
मुरझा सा गया हूँ
काँटो से लढते लढते
जिंदगी ख्वाब से रूठने लगा हूँ
सपने देखते देखते
थक सा गया खुद को
आयेना सा दिखाते दिखाते ,
खुदको दिपक सा जलाते जलाते
थक सा गया हूँ,
वक्त को ढलते चांद सा सफेद होते हुये
सीतारों से गुफ्तगु करते करते थक सा गया हूँ।
