STORYMIRROR

Naushaba Suriya

Abstract

4  

Naushaba Suriya

Abstract

थक सा गया हूँ

थक सा गया हूँ

1 min
395

थक सा गया हूँ

 ऐ जिंदगी खुदको समझाते समझाते

 मुरझा सा गया हूँ

 काँटो से लढते लढते

जिंदगी ख्वाब से रूठने लगा हूँ


सपने देखते देखते

थक सा गया खुद को

आयेना सा दिखाते दिखाते ,

खुदको दिपक सा जलाते जलाते

थक सा गया हूँ,

वक्त को ढलते चांद सा सफेद होते हुये


सीतारों से गुफ्तगु करते करते थक सा गया हूँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract