STORYMIRROR

Naushaba Suriya

Abstract

4  

Naushaba Suriya

Abstract

सहारा

सहारा

1 min
10

लड़ा नहीं जाता अब हालात से

अब टूटते हुए सपनो के टुकड़ों को

 संभाला नही जाता

मां की ममता का स्नेह अब

बताया नही जाता


अब बस दुआ वों का सहारा है

मन्नतो का आसरा है

वक्त के साये तले

हर शक्स का बेनकाब चेहरा है


अपनी तन्हाई में अब हम

टूटते हुए मोती मंजूर नहीं करते

लड़खड़ाते कदम हम कुबूल नही करते


चमकती थी आंखें कुछ ख्वाब के लिए

अब ये हालात हम मंजूर नहीं करते

अब खुदा से से यह राह फिरसे कुबूल नही करते


टूटते हुए सितारों का

अब बस आसमा सहारा है

चमकते हुए तारो का

उजाला भी अब गहरा है

अब हालातों से लड़ा नहीं जाता

अब बस दुआ वों का सहारा है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract