तेरी कमी है
तेरी कमी है
अब हमें भी तो खलने लगी तेरी कमी है,
दूर जाकर रहने लगी तुम ये ही कमी है।
बचपन में साथ-साथ जीवन बिताया था,
साथ-साथ खाना पीना उठना व बैठना था।
ज़िन्दगी पतझड़ का मौसम लगने लगा है,
बसंत की बहारें रूठकर जैसे चली गई है।
दिल में बारूद बनके तेरी यादें पल रही है,
दिल को तेरी ही कमी तो हमें खल रही है।
ना जाने ये आँखें क्यों आँसू बहाने लगी है,
इन आँखों की नमी सबको दिखने लगी है।
मजबूरी दूर जाना मुझे छोड़कर ज़रूरी था,
अंकल जी का तबादला दूर बहुत हुआ था।
