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Dr Kaushal N Jadav

Abstract

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Dr Kaushal N Jadav

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तेरा मकाम

तेरा मकाम

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मकाम तेरा तय है तो

क्यों है ये दशा तेरी

अगर सपने देखना

गुनाह है तो

बन जा तू सजा तेरी


उम्मीदों की परछाईं को

पकड़ने निकला है ना तू

अब यूँ रास्तों पर भटक जाना

यही है सजा तेरी


मुश्किलें हर वक्त

साथ होगी तेरे

लेकिन उसे हमसफ़र

बनाकर

चलना यही है वफ़ा तेरी


फासला तेरा तय है और

रास्ता भी है साफ

पर रास्तों पे यूँ मायूस

मत होना

क्योंकि यही है इंतेहा तेरी


आसमान में उड़ने के

ख़्वाब मत देखो

क्योंकि वो झुकता

नहीं कभी

पर जब तू झकने लगे

तो समझना

यही है सजा तेरी


मकाम तेरा तय है तो

क्यों है ये दशा तेरी

अगर सपने देखना

गुनाह है तो

बन जा तू सजा तेरी....



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