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Anjali Singh

Abstract

4.3  

Anjali Singh

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तड़पन

तड़पन

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कोई ना जाने, कोई ना माने 

सब यही चाहे, मछली बिन पानी रह जाए। 


तड़पन उसकी, पीड़ा उसकी 

चाहे तड़प - तड़प, क्यू ना मर जाए। 


देख उसको पकड़ना, चाहे 

जब न पकड़ मे आए, तब कई तरकीब लगाए। 


कोई ना जाने, कोई ना माने 

सब यही चाहे, मछली बिन पानी रह जाए। 


तैरन चाहे, खेलन चाहे

संग पानी के मचली जाये।


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