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रिपुदमन झा "पिनाकी"

Inspirational

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रिपुदमन झा "पिनाकी"

Inspirational

स्वर्णिम भारत

स्वर्णिम भारत

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शान से लहराएगा तिरंगा आसमान में।

जब बहेगी अमन की हवाएं इस जहान में।।

जाति,धर्म,वर्ग का न भेद मन में घर करे।

आदमी रहे खुशी से द्वेष भाव रख परे।।

दिल में रहे राम भी और हो अल्लाह भी।

मन में शुद्ध भाव हो प्रेम की बहे नदी।।

न गलत प्रयोग हो कानून और विधान का।

आदर सम्मान हो जन मन में संविधान का।।

अन्यायी न्याय न करें कभी अत्याचार से।

भावना न आहत हो जनमन की दुष्प्रचार से।।

निस्वार्थ भाव से जनसेवक भी काम करें।

देश और जनहित के सारे इंतजाम करें।।

देश अपना सोने की चिड़िया फिर से बने।

आज हो गौरवशाली और स्वर्णिम कल बने।।



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