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Usha Gupta

Inspirational

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Usha Gupta

Inspirational

मानव

मानव

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है सर्वश्रेष्ठ कृति ईश्वर की मानव, बुद्धि से परिपूर्ण सर्वगुण सम्पन्न,

कभी कर सदुपयोग बुद्धि का, कर जाता है अद्भुत और अनुपम कार्य,

तो कर जाता है कभी ऐसे घिनौने कृत्य कि जिसे पशु भी न करे कभी।

 है शक्ति परखने की सही और ग़लत, सत्य और असत्य की,

परन्तु होंगे मुट्ठी भर ही मानव ऐसे जो कर संचालन बुद्धि का,

चलते हैं सही दिशा में कर अंगीकार मार्ग सत्य का,

परन्तु करते हैं चयन अधिकांशत: मानव राह ग़लत, असत्य की।


ऊँचाईयों को छूते हुये पहुँच गया मानव धरती पर चाँद की,

गिरते हुए गिर गया नीचे इतने कि हुआ न संतुष्ट 

कर बलात्कार भी नन्ही-सी बच्ची का, दिया उतार मौत के घाट उसे।

होता नहीं समाप्त क़िस्सा यहीं,

हैं सौदागर निपुण अनेक करने को परिवर्तित सत्य को असत्य में,

ओर असत्य को सत्य में,

छुड़ा क़ानून के हाथों देते छोड़ समाज में दोहराने कार्य वीभत्स।


दे बलिदान अपना बन शहीद छुड़ा लिया धरती माँ को, ज़ंजीरों से ग़ुलामी की,

परन्तु बिछा डाली लाशें अपने ही देशवासियों की, थे जो पालनकर्ता दूसरे धर्म के,

चढ़ गये फाँसी भून गोलियों से किये अत्याचार जिन विदेशी शासकों नें,

चला डाली गोलियाँ उस महात्मा पर भी दिखाया सूर्योदय स्वतंत्रता का जिसने।


होती है माँ रूप दूसरा ईश्वर का, करता बालक सुरक्षित अनुभव गोद में माँ की,

होता नहीं विश्वास परन्तु हैं कुछ मुट्ठी भर माँए ऐसी जो देतीं सुला सदा के लिये पुत्री को अपनी,

पिता देता है कर समर्पित जीवन सवांरने मे भविष्य बालकों का अपने,

परन्तु है नहीं कमी पिताओं की ऐसे जो हैं डालते कुदृष्टि अपनी ही पुत्रियों पर।


वीर मानव देते पहरा देश की सीमाओं पर जूझते हुए विषम परिस्थितियों से,

चन्द लालची मानव देते बेच गोपनीय दस्तावेज़ दुश्मनों को चाँदी के सिक्कों की ख़ातिर,

करते नहीं परवाह अपनी धरती माँ और अपने देशवासियों की।


हैं गाथायें अनेक मानव की छूने को असीमित आकाश तो हैं गाथायें अनन्त गर्त में गिरने की।।



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