STORYMIRROR

DEVSHREE PAREEK

Inspirational

4  

DEVSHREE PAREEK

Inspirational

स्वप्निल ऊंचाइयाँ…

स्वप्निल ऊंचाइयाँ…

1 min
285

तेरे मेरे बीच, ये क्या चलता है

कोई रिश्ता, बिना संबोधन ही पलता है…

परायों की तरह, जीते रहे सालों

फिर भी अजनबी, मेरे साथ- साथ चलता है…

कुछ स्वप्निल ऊंचाइयाँ, छूनी है हमें

देखते हैं दोनों में से, कौन आगे निकलता है…

बुनती रही सपनों को, आस की डोर से

बुनते- बुनते हक़ीक़त से, हर सिरा उलझता है…

क्या करना है मेरे हासिल का, हिसाब करके

ये दिल तो रोज़, उस सौदागर के हाथों बिकता है.


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational