Revolutionize India's governance. Click now to secure 'Factory Resets of Governance Rules'—A business plan for a healthy and robust democracy, with a potential to reduce taxes.
Revolutionize India's governance. Click now to secure 'Factory Resets of Governance Rules'—A business plan for a healthy and robust democracy, with a potential to reduce taxes.

Basudeo Agarwal

Abstract

2.1  

Basudeo Agarwal

Abstract

सुमति छंद "भारत देश"

सुमति छंद "भारत देश"

1 min
329


(सुमति छंद)

प्रखर भाल पे हिमगिरि न्यारा।

बहत वक्ष पे सुरसरि धारा।।

पद पखारता जलनिधि खारा।

अनुपमेय भारत यह प्यारा।।


यह अनेकता बहुत दिखाये।

पर समानता सकल बसाये।।

विषम रीत हैं अरु पहनावा।

सकल एक हों जब सु-उछावा।।


विविध धर्म हैं, अगणित भाषा।

पर समस्त की यक अभिलाषा।।

प्रगति देश ये कर दिखलाये।

सकल विश्व का गुरु बन छाये।।


हम विकास के पथ-अनुगामी।

सघन राष्ट्र के नित हित-कामी।।

'नमन' देश को शत शत देते।

प्रगति-वाद के परम चहेते।।

=================

*सुमति छंद* विधान:

गण "नरानया" जब सज जाते।

'सुमति' छंद की लय बिखराते।।

"नरानया" = नगण रगण नगण यगण 

(111 212 111 122)

2-2चरण समतुकांत, 4चरण।

***************


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract