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Dr.Deepak Shrivastava

Inspirational

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Dr.Deepak Shrivastava

Inspirational

सुख दुःख

सुख दुःख

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स्थाई कुछ भी नहीं

ना ये दुःख ना ये सुख

तुम भी नहीं मैं भी नहीं

फिर किस बात का सोच

तुम भी जिओ हम भी जिए

हम दुखी तुम भी दुखी

हम भी सुखी

तुम भी सुखी 

कोई किसी बात से

कोई किसी बात से 

बातें तो होती रहती

कभी अच्छी कभी बुरी

सोचते हम जिन्हे

कभी होती पूरी कभी

रहती अधूरी

फिर क्यों हम तुम दुखी

देखते जो ख्वाब

कभी अच्छे कभी बुरे

कभी होते पूरे कभी

रहते अधूरे

जब कुछ नहीं होता स्थाई

फिर क्या बात हे दुखदाई

ये आग सब मन की हे लगाई

जिसे मन ने ही बुझाई

कहते सब मन के हारे हार हे

मन के जीते जीत

हम कहते मन के ही

सब दुःख हे मन के

ही सब सुख

करो मन को अपने बस 

फिर ना कोई हे सुख 

ना हे कोई दुःख

करो मन को काबू मैं

रहो चिकने घड़े जैसे

सावन के हरे ना

भादों के सूखे 

जिओ जी भर के

पीओ दिल भर

फिर चाहे सोमरस

या नारियल का जल 

दुःख ओर सुख तो

एक खिलौना हे

आज खेला कल को

घर का कोई कोना हे

जैसे आज नहीं कल

को होना हे

घाव पर मल्हम

समय से ही तो

लगना हे

समय से ही सब को

भरना हे

फिर किस बात का

रोना हे

खुश रहो मस्त रहो

किस किस को रोओ

किस किस को गाओ

जो आज हे जो मिला हे

उसे जिओ जी भर के

पियो दिल भर के

खाओ उदर भर के

यही जिंदगी का

फ़साना हे

बाकी तो सब

एक अफसाना है।


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