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shekhar kharadi

Abstract

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shekhar kharadi

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सुबह

सुबह

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सुबह सुबह खिल उठेंगे

मधुवन पुष्पों का चितवन ।

सुबह सुबह उड़ान भरेंगे

पंछियों का गुनगुनाता झुंड ।

सुबह सुबह झूम उठेगी

खेतों की अल्हड़ जवानी ।

सुबह सुबह झाड़ू लेकर

अंगना को खूब रिझाओगी ।


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